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agriculture department himachal pradesh logo

Department of Agriculture

Himachal Pradesh

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      Himachal Pradesh

        उर्वरक

         
        तत्व
        उर्वरक
         
        (कि.ग्रा./है.)
        (कि.ग्रा./ है.)
        (कि.ग्रा./ बीघा)
         
        ना.
        फा.
        पो.
        यूरिया
        एस.एस.पी.
        एम.ओ.पी.
        यूरिया
        एस.एस.पी.
        एम.ओ.पी.
        अधिक उपज 90 40 40 195 250 65 16 20 5
        स्थानीय 50 25 25 110 156 42 9 12 3
                     
        (कि. ग्रा./ कनाल)
        अधिक उपज             8 10 2.5
        स्थानीय             4.5 6 1.5

        ● सारी फास्फोरस व पोटाश और आधी नाईट्रोजन अन्तिम बार मच्च करते समय डाल दें। बाकी नाईट्रोजन को दो बराबर भागों में बांटकर, एक भाग को रोपाई के तीन सप्ताह बाद दौजियां निकलने के समय और दूसरे भाग को उससे 2-3 सप्ताह बाद दें। यदि गोबर की खाद 5 टन प्रति हैक्टेयर (शुष्क भार के आधार पर) की दर से डाली जाए तो रासायनिक खादों की उपरोक्त मात्रा का आधा भाग ही डालें।

        ● उन भूमियों में जहां सारा साल पानी खड़ा रहता है और केवल धान की फसल ही उगाई जाती हो, नाईट्रोजन और फास्फोरस क्रमशः 60 कि.ग्रा. और 40 कि.ग्रा. प्रति हैक्टेयर दें।

        ● यदि पिछली रबी की फसल में फास्फोरस और पोटाश पूरी मात्रा में दी हो तो धान में इन उर्वरकों को देने की आवश्यकता नहीं है।

        ● बारानी धान के लिए 60 कि. ग्रा. नाईट्रोजन, 30 कि. ग्रा. फास्फोरस और 30 कि. ग्रा. पोटाश प्रति हैक्टेयर प्रयोग करें। नाईट्रोजन की 50 प्रतिशत मात्रा पौधों के उगने के बाद पहली बारिश के साथ, 25 प्रतिशत मात्रा दौजियां निकलने के समय तथा शेष 25 प्रतिशत उससे 3-4 सप्ताह बाद दें। सारी फास्फोरस और पोटाश बिजाई के समय पर ही दें। इसके अतिरिक्त 5 टन गोबर की खाद (शुष्क भार के आधार पर) प्रति हैक्टेयर खेत तैयारी के समय डालें।

         

        जस्त की कमी:
        • ● प्रायः इस सूक्ष्म पोषक तत्व की कमी धान की फसल में अधिक पाई जाती है। इसकी कमी उन जमीनों में अधिक होती है जहां से ऊपर की मिट्टी हटा दी गई हो या जो क्षारीय मिट्टी हो तथा जिसमें कैल्शियम कार्बोनेट अथवा कार्बन की अधिकता हो। जस्त की कमी के कारण धान के पत्तों की मध्य शिरा सफेद या हल्की पीली हो जाती है। परन्तु पत्तों के सिरे हरे ही रहते हैं। यह लक्षण रोपाई के 3-4 सप्ताह के बाद पौधों के नीचे से तीसरे या चौथे पत्तों पर प्रकट होते हैं।
        • ● इसके अतिरिक्त, पत्तों पर हल्के पीले रंग के धब्बे पड़ जाते हैं जो आकार में बढ़ने से आपस में मिल जाते हैं और इनका रंग भूरा हो जाता है। धीरे-धीरे पूरा पत्ता भूरा होकर सूख जाता है। वास्तव में पौधे की किसी भी अवस्था में यदि पत्ते की मध्य की शिरा पूरे पत्ते के रंग से हल्की हो तो यह जस्त की कमी ही समझी जानी चाहिए।
        • ● जस्त की कमी को जिन्क सल्फेट (25 कि.ग्रा/ है या 1 कि.ग्रा./ कनाल) डालकर ठीक किया जा सकता है। परन्तु इसके प्रयोग से पहले मिट्टी तथा पौधे का विश्लेषण किया जाना चाहिए। जस्त तत्व की कमी को दूर करने के लिए पौध को रोपाई से पहले 1 प्रतिशत जिंक आक्साइड़ के घोल में 30 मिनट तक डुबोकर दूर किया जा सकता है। जिंक सल्फेट को फास्फोरस उर्वरक देने के दो दिन बाद ही खेत में डालना चाहिए। यदि पत्तों पर जस्त तत्व की कमी के लक्षण प्रकट होते हैं तो जिंक सल्फेट 0.5 प्रतिशत (5 कि. ग्रा. जिंक सल्फेट और 2.5 कि. ग्रा. चूना 1000 लीटर पानी में घोलकर) का छिड़काव प्रति हैक्टेयर करें।