जुताई व बिजाई
i. भूमि की तैयारी
धान हर प्रकार की जमीन, चाहे वह रेतीली हो या चिकनी अथवा अम्लीय या क्षारीय, पर उगाया जाता है लेकिन पानी की सुविधा, चाहे सिंचाई से हो या निश्चित बारिश से, आवश्यक है । भारी जमीन जिसमें सिंचाई या बारिश का पानी खड़ा रह सके, धान के लिए उपयुक्त है ।
ii. बीज
बिजाई के लिए केवल स्वस्थ बीजों का ही प्रयोग करें। ऐसे बीजों के चयन के लिए 10 प्रतिशत नमक का घोल (100 ग्राम नमक प्रति लीटर पानी की दर से) आवश्यकतानुसार बनाएं। बीज को बर्तन की क्षमतानुसार इस घोल में डालकर हिलाएं और तैरते हुए बीजों को निकाल दें। नीचे बैठे बीजों को साफ पानी से अच्छी तरह धोकर छाया में सुखा लें। इस घोल को बीज चयन के लिए कई बार प्रयोग किया जा सकता है।
बीज से लगने वाली बिमारियों से बचाव के लिए सूखे बीजों को 2.5 ग्राम बैवीस्टीन प्रति कि. ग्रा. बीज की दर से घड़े में डालकर अच्छी तरह हिलाएं।
बिजाई के लिए अच्छे बीज की निम्नलिखित विशेषताएं होनी चाहिए:
• बीज शुद्ध प्रजाति का होना चाहिए।
• बीज स्वस्थ, रोग रहित, विषाणु, सूत्रकृमि तथा बैक्टीरिया से मुक्त होना चाहिए।
• बीज अंकुरण की सही अवस्था में होना चाहिए।
कन्द के आकार के अनुसार इसे समूचे तथा छोटे टुकड़ों में काटकर बोया जा सकता है। यदि कन्द का आकार बड़ा हो तो इस प्रकार काटें कि प्रत्येक टुकड़े में कम से कम दो आंखे हों और प्रत्येक टुकड़े का भार 30 ग्राम से कम न हो। कटे हुए टुकड़ों को डाईथेन एम-45 / इंडोफिल एम-45 (0.25%) के घोल से उपचार करने से अच्छी फसल व उपज प्राप्त होती है।
iii. बिजाई का ढंग
धान की रोपाई केवल उन्हीं परिस्थितियों में करनी चाहिए जहां पानी की सुनिश्चित व्यवस्था हो । इस विधि में सबसे पहले पौध (पनीरी) तैयार की जाती है और फिर पौधों को मच्च किए गए खेत में लगाया जाता है।
रोपाई द्वारा खेती करने की 2 मुख्य विधियां हैं:
1. प्रचलित विधि: इस विधि में 25-30 दिन की पौध की रोपाई की जाती है।
2. धान सघनीकरण प्रणाली अथवा एस.आर.आई. विधि: यह एक आधुनिक विधि है, जिसमें 15-18 दिन की पौध की रोपाई की जाती है।
iv. बिजाई का समय
पनीरी की बिजाई का समय:
किस्म |
प्रचलित विधि |
एस.आर.आई. विधि |
| बासमती | 20 मई-31 मई | 1 जून-15 जून |
| अन्य व संकर | 20 मई-7 जून | यथोपरि |



