बीजोत्पादन
- ● मटर की फसल स्वपरागित है इसलिए इसकी विभिन्न किस्मों का बीज पास के खेतों में बिना बाहिरी परागण के खतरे से किया जा सकता है। फिर भी प्रमाणित बीज के लिए 10 मीटर का अन्तर मिश्रण से बचने के लिए अनिवार्य है।
- ● रोग ग्रस्त और दूसरी किस्मों के अवांछनीय पौधों को फसल की विभिन्न अवस्थाओं में जैसे कि वनस्पति, फूल आने पर तथा फलियाँ बनने पर निकालते रहें।
- ● फसल की पूरी अवधि में खेतों में नमी पर्याप्त होनी चाहिए। पकने पर पौधे पीले पड़ने लगते हैं तब उन्हें उखाड़ कर अच्छी तरह सुखा लें और फिर बीज निकालें।
- ● बीज को साफ करके, सुखाकर बन्द डिब्बों में रखें।
- ● कीटों से बचाव के लिए बीज की मात्रा के अनुसार डिब्बों में सेलफॉस की गोलियाँ अवश्य डालें।
- ● बीजाई से पहले फफूंदनाशकों से बीज उपचार अवश्य करें ताकि बीज जनक व्याधियों से बचाव हो सके।
बीज उपज
प्रति हैक्टेयर (क्विटल) |
प्रति बीघा (कि. ग्रा.) |
प्रति कनाल (कि. ग्रा.) |
| 10-15 | 80-120 | 40-60 |



