आक्रमण / लक्षण
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नियंत्रण
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| दीमक: निचले पर्वतीय क्षेत्रों केअसिंचित इलाकों में अंकुरित पौधों को क्षति पहुंचाती है।

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- बीज का क्लोरपाईरीफॉस 20 ई.सी. (4 मि.ली. / कि.ग्रा. बीज) से उपचार करें
- दो लीटर क्लोरपाईरीफॉस 20 ई.सी. को 25कि.ग्रा. रेत में मिलाकर प्रति हैक्टेयर बिजाईके समय खेत में डालें।
- बिजाई करने से पहले पिछली फसल के अवशेषों को इक्ट्ठा करके नष्ट कर दें।
- खेतों के नजदीक दीमक की बामी (मॉउँड) को रानी सहित नष्ट करें।
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| टिड्डे: अंकुरित फसल के पौधों को नष्ट कर हानि पहुंचाते हैं। कई बार घाटी व निचले पर्वतीय क्षेत्रों में बहुत हानि पहुंचाते हैं।

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फोलीडॉल 2% धूल 25 कि.ग्रा./ है.का छिड़काव करेंक्योंकि टिड्डे निकटवर्ती खेतों व मेढ़ों से जहां घास उग रही होती है वहां से गेहूं व जौ की फसल में आते हैं अतः इन स्थानों पर भी उपचार करें। |
| आर्मीवर्म: फसल के कोमल पत्तों को खाती है और एक खेत से दूसरे खेत को तबाह करके बढ़ती जाती है।

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सुंडियों को इक्ट्ठा करके नष्ट कर दें। |
| गेहूं का तेला: यह कीट पत्तों से रस चूसकर हानि पहुंचाता है। जिसके फलस्वरूप दाने बनने में बाधक सिद्ध होता है।

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50 ग्राम थायामिथोक्सेम 25 डब्ल्यू जी. 500 लीटर पानी में या 500 मि.ली. क्वीनलफॉस 25 ई.सी. प्रति 500 लीटर पानी में घोलकर छिडकाव करें। |