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Department of Agriculture

Himachal Pradesh

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        खरपतवारों की रोकथाम

        आलू की फसल को जब खरपतवारों के साथ बढ़ना पड़ता है तो उपज में बहुत अधिक कमी आ जाती है। अतः यह आवश्यक है कि फसल को प्रारंभिक अवस्था में खरपतवारों से मुक्त रखा जाए। निराई-गुड़ाई उचित रूप से एवं कम खर्च से तभी हो सकती है यदि फसल की बिजाई पंक्तियों में की हो। पहली निराई-गुड़ाई फसल की 75% अंकुरण पर करनी चाहिए और यह अवस्था बिजाई के लगभग 30 दिनों के बाद आती है। जब पौधे 15-20 सें.मी. लम्बे हो जाएं तो दूसरी निराई-गुड़ाई करके मिट्टी चढ़ा देनी चाहिए।

        खरपतवारों की रोकथाम रसायनिक विधि से भी की जा सकती है। निम्नलिखित खरपतवारनाशियों में से किसी एक का 700-800 लीटर पानी प्रति हैक्टेयर में प्रयोग किया जा सकता है:-

        क्र.
        खरपतवारनाशी
        मात्रा (स.प.ग्रा/ है)
        प्रयोग का समय
        1. फलूक्लोरालिन (45 ई.सी. / बासालिन) 1.0 बिजाई से पहले
        2. आइसोप्रोटुरान (एरीलॉन / ग्रोमिनॉन 75 डब्लयू. पी.) 1.0 बिजाई के बाद (48 घंटे के अंदर)
        सावधानियां :

        • बासालिन का प्रयोग शाम के समय करना चाहिए ताकि सूर्य की रोशनी से इसका वियोजन न हो।

        • छिड़काव के लिए फ्लैट फैन नॉजल का प्रयोग करें और एक स्थान पर बार बार छिड़काव न करें।

        • आलू की बसन्त-कालीन फसल में जब 5% से अधिक पौधे न उगे हों (बिजाई के 35-40 दिन बाद) तो उगे हुए खरपतवारों के नियन्त्रण हेतु पैराक्वैट 600 ग्रा./ है. (2.5 ली. ग्रामाक्सोन 24 डब्ल्यू एस. पी. / 700-800 लीटर पानी प्रति हैक्टेयर) की दर से छिड़काव करें।