यह केन्द्रीय प्रायोजित योजना राष्ट्रीय सत्त खेती मिशन के अंतर्गत वर्ष 2015-16 में लागू की गई।
उद्देश्य:
- भूमि की उपजाऊ शक्ति को बढ़ाना
- जलवायु के अनुसार रसायन मुक्त फसलों की खेती को बढ़ावा देना
इस योजना को भारत सरकार के अनुमोदित सेवा प्रदाताओं के द्वारा समूह बनाकर तथा पी जी एस प्रणाली में कृषकों तथा फसलों का जैविक मापदण्डों के अनुसार पंजीकृत करके प्रमाणीकरण किया जाता है।
1. जैविक खेती कार्यक्रम
प्रदेश में इस योजना में जैविक खेती को प्रोतसाहित करने के लिए किसानों को 20 हैक्टेयर क्षेत्र में समूह बनाकर 3 वर्षो मे चरणवद्व कार्यक्रम अपनाकर फसलों को प्रमाणित किया जाता है। भारत सरकार नें वर्ष 2017-18 में 100 तथा वर्ष 2018-19 में 75 कलस्टर (समूह) को स्वीकृत किया गया। वर्ष 2020-21 में दूसरे वर्ष की धनराशि आंबटित की गई लेकिन कोविड – 19 बीमारी के कारण योजना कार्यान्वित नहीं की गई। वर्ष 2022-23 में जिला के कृषि उपनिदेशकों/अधिकारियों द्वारा द्वितीय वर्ष का कार्यक्रम चलाया गया। 4344.15 हैक्टेयर क्षेत्र तथा 7480 कृषकों को जैविक खेती के अंतर्गत लाकर कृषकों को लाभान्वित किया गया तथा 960.94 लाख रूपये व्यय किये।
- वर्ष 2023-24 (तृतीय वर्ष) की योजना गतिविधियों के लिए भारत सरकार को 468.68 लाख की कार्य योजना थी लेकिन भारत सरकार से धन आवंटन न होने के कारण व्यय नहीं किया गया जबकि लंबित अदायगी 17.85 लाख भारत सरकार से 2024-25 प्रमाणीकरण कार्य हेतु व्यय किये गऐ।
2. भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्वति
भारत सरकार ने भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति को वर्ष 2020-21 में परम्परागत कृषि विकास योजना में एकत्रित करके प्रदेश में प्राकृतिक खेती अपनाने हेतु परियोजना निदेशक (आत्मा) के माध्यम से सभी जिलों में चलाया जा रहा है। वर्ष 2024-25 (द्वितीय वर्ष) में इस योजना के अन्तर्गत मु० 828.00 लाख रुपये 31.03. 2025 तक पूर्णतः व्यय कर 12516.7 हैक्टेयर क्षेत्र पर 31366 किसानों को लाभान्वित किया गया।
- वर्ष 2025-26 (तृतीय वर्ष) के लिए इस योजना के अंतर्गत 866.00 लाख रुपए का प्रावधान है इस वर्ष अभी तक 231 लाख रुपए रुपए का आवंटन हो चुका है।



