Institute of Himalayan Bio Technology (IHBT), पालमपुर द्वारा हींग की एक नई प्रजाती की पहचान की गई है जो कि चम्बा, लाहौल-स्पिति और किन्नौर जिलों की उंचाई वाले क्षेत्रों में उगाई जा सकती है। इसी तरह कुछ क्षेत्रों में केसर की खेती के लिए अनुकूल जलवायु एवं वातावरण पाया गया है। इन दोनों की खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2021-22 से कृषि से संपन्नता योजना प्रस्तावित की गई। इस योजना के क्रियान्वयन हेतु विभाग द्वारा विस्तृत कार्य योजना तैयार कर 6 जून, 2020 को IHBT के साथ एम.ओ.यू. हस्ताक्षरित किया गया।
योजना के अन्तर्गत हींग व केसर की खेती की शुरूआत करना व प्रगतिशील किसानों के खेतों में हींग व केसर की फसलों के प्रदर्शन लगाना शामिल है। इसके साथ-साथ अधिकारियों व किसानों को इस खेती की विधि की व्यापक जानकारी देने के लिए प्रशिक्षणों का प्रावधान भी है। वर्ष 2020-24 के लिए मु0 696.60 लाख रुपये का बजट प्रावधान किया गया । योजना के आरम्भ से लेकर वर्ष 2023-24 तक 578.36 लाख रूपये व्यय कर 12.29 हैक्टेयर क्षेत्र कवर करते हुये कवर करते हुये 11964 किसानों को 60,324 हींग की पौध व 10,583 कि० ग्रा० केसर की गांठे वितरित की गई।



