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Department of Agriculture

Himachal Pradesh

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      Himachal Pradesh

        कीट प्रबंधन

        आक्रमण / लक्षण

        नियंत्रण

        दीमक: निचले पर्वतीय क्षेत्रों केअसिंचित इलाकों में अंकुरित पौधों को क्षति पहुंचाती है।

        1. बीज का क्लोरपाईरीफॉस 20 ई.सी. (4 मि.ली. / कि.ग्रा. बीज) से उपचार करें
        2. दो लीटर क्लोरपाईरीफॉस 20 ई.सी. को 25कि.ग्रा. रेत में मिलाकर प्रति हैक्टेयर बिजाईके समय खेत में डालें।
        3. बिजाई करने से पहले पिछली फसल के अवशेषों को इक्ट्ठा करके नष्ट कर दें।
        4. खेतों के नजदीक दीमक की बामी (मॉउँड) को रानी सहित नष्ट करें।
        टिड्डे: अंकुरित फसल के पौधों को नष्ट कर हानि पहुंचाते हैं। कई बार घाटी व निचले पर्वतीय क्षेत्रों में बहुत हानि पहुंचाते हैं।

         

        फोलीडॉल 2% धूल 25 कि.ग्रा./ है.का छिड़काव करेंक्योंकि टिड्डे निकटवर्ती खेतों व मेढ़ों से जहां घास उग रही होती है वहां से गेहूं व जौ की फसल में आते हैं अतः इन स्थानों पर भी उपचार करें।
        आर्मीवर्म: फसल के कोमल पत्तों को खाती है और एक खेत से दूसरे खेत को तबाह करके बढ़ती जाती है।

        सुंडियों को इक्ट्ठा करके नष्ट कर दें।
        गेहूं का तेला: यह कीट पत्तों से रस चूसकर हानि पहुंचाता है। जिसके फलस्वरूप दाने बनने में बाधक सिद्ध होता है।

        50 ग्राम थायामिथोक्सेम 25 डब्ल्यू जी. 500 लीटर पानी में या 500 मि.ली. क्वीनलफॉस 25 ई.सी. प्रति 500 लीटर पानी में घोलकर छिडकाव करें।